कोडल ग्राम पंचायत में 15 लाख के सामुदायिक भवन निर्माण में गड़बड़ी, प्लिंथ स्तर पर ही दीवार गिरी

0
Spread the love


तेंदुखेड़ा (दमोह)।
सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक एवं पारिवारिक आयोजनों के लिए सामुदायिक भवनों का निर्माण कराया जा रहा है, लेकिन कई जगहों पर इन निर्माण कार्यों में गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला जनपद पंचायत तेंदुखेड़ा की ग्राम पंचायत कोडल में सामने आया है, जहां लगभग 15 लाख रुपये की लागत से बन रहे सामुदायिक भवन में शुरुआती चरण यानी प्लिंथ स्तर पर ही अनियमितताएं देखने को मिली हैं।

जानकारी के अनुसार, इस भवन को स्टाम्प शुल्क (राज्य स्तरीय) योजना के तहत 1 जनवरी 2025 को स्वीकृति मिली थी। वर्तमान में निर्माण कार्य जारी है, लेकिन मौके पर निरीक्षण के दौरान कई खामियां उजागर हुईं।

प्लिंथ में ही दिखी गंभीर लापरवाही

स्थानीय लोगों के अनुसार, सेप्टिक टैंक के ऊपर बनाई गई करीब 2 फीट ऊंची दीवार एक तरफ से टूटकर गिर गई है। प्लिंथ भराई में सीमेंट, गिट्टी और लोहे की मात्रा कम रखते हुए ईंट-पत्थर मिलाए गए हैं, जो साफ दिखाई दे रहे हैं।

इतना ही नहीं, जहां सेप्टिक टैंक बनाया जा रहा है, वहां प्लिंथ बीम का स्तर अन्य हिस्सों से करीब 2 फीट नीचे पाया गया, जबकि नियमानुसार इसका लेवल समान होना चाहिए।

नियमों के विरुद्ध भराई, भविष्य में फर्श टूटने का खतरा

ग्रामीणों का आरोप है कि प्लिंथ भराई में मिट्टी या मुरम की जगह बड़े पत्थरों का उपयोग किया गया है, जो नियमों के खिलाफ है। इससे भवन बनने के बाद फर्श धंसने और चटकने की आशंका बनी हुई है।

बताया गया कि जेसीबी से की गई भराई अभी तक ठीक से सेट नहीं हुई है और बड़े पत्थरों के कारण भविष्य में संरचना को नुकसान हो सकता है।

सामग्री खरीदी पर भी सवाल

पंचायत दर्पण पोर्टल में दर्ज बिलों के अनुसार लाखों रुपये की सामग्री खरीदी गई है—

17 हजार ईंट (₹1,02,000)

20 एमएम गिट्टी (₹98,000)

सीमेंट 330 बोरी (₹99,000)

सरिया सहित अन्य सामग्री मिलाकर कुल लगभग ₹4,91,100

लेकिन मौके पर इतनी सामग्री का उपयोग दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि न तो पर्याप्त सीमेंट का उपयोग हुआ और न ही निर्माण के बाद उचित तराई (क्योरिंग) की गई, जिसके कारण दीवार गिर गई।

तकनीकी निगरानी पर भी सवाल

निर्माण के दौरान न तो कोई इंजीनियर और न ही संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे मजदूरों ने मनमाने तरीके से काम किया। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि प्लिंथ स्तर पर ही यह स्थिति है, तो भवन की उम्र दो वर्ष भी नहीं होगी।

जांच की मांग

ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य इंजीनियर की उपस्थिति में स्वीकृत स्टीमेट के अनुसार कराया जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

अधिकारी का पक्ष

इस संबंध में एसडीओ एच के राज ने बताया,
“दीवार गिरने की जानकारी अभी नहीं थी। प्लिंथ का स्तर बैलेंस के लिए किया गया होगा। भराई मुरम से होनी चाहिए थी, यदि पथरीला मटेरियल डाला गया है तो इसकी जांच करवाई जाएगी।”


निष्कर्ष:
ग्राम पंचायत कोडल में सामुदायिक भवन निर्माण में सामने आई गड़बड़ियां न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग की ओर संकेत करती हैं, बल्कि ग्रामीणों की आवश्यक सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े करती हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी गंभीरता से जांच कर कार्रवाई करता है।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

हो सकता है आप चूक गए हों