कडोरो की योजना फेल: कोसमदा में ‘हर घर जल’ सिर्फ कागजों में, ज़मीनी हकीकत—हवा और प्यास! 🔥

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तेंदुखेड़ा/दमोह।
मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी सतधारु योजना—जिस पर 300 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए—आज दमोह जिले के कई गांवों में दम तोड़ती नजर आ रही है। कागजों में “हर घर जल” का दावा करने वाली यह योजना जमीनी स्तर पर “हर घर हवा” बन चुकी है।

तेंदुखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायत कोटखेड़ा का आश्रित गांव कोसमदा इसका जीता-जागता उदाहरण है। यहां पाइपलाइन बिछी, कनेक्शन हुए, पानी की टंकी भी खड़ी कर दी गई—लेकिन नल से आज तक एक बूंद पानी नहीं निकला। ग्रामीणों के मुताबिक, योजना शुरू हुए तीन साल से ज्यादा हो गए, लेकिन हालात जस के तस हैं।

👉 स्थिति इतनी बदतर कि 200 की आबादी और मवेशी सिर्फ एक हैंडपंप पर निर्भर हैं।
👉 हैंडपंप खराब हुआ तो 2 किलोमीटर दूर ब्यारमा नदी का सहारा—वो भी गर्मी में सूखी और गंदे कुंडों में बचा पानी!


⚠️ बड़ा सवाल—जिम्मेदार कौन?

ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत ने पानी के नाम पर ढाई लाख रुपये से ज्यादा राशि निकाल ली, लेकिन पानी की सप्लाई शुरू नहीं कराई।
टंकी बनी, पाइपलाइन बिछी—पर पानी नहीं!
लाइन कौन खोलता है, कौन बंद करता है—गांव वालों को कुछ पता नहीं!

क्या यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार नहीं?
क्या यह सरकारी धन की खुली लूट नहीं?


⚖️ कानून भी देता है पानी का अधिकार

यह मामला सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि अधिकारों का हनन है—

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21: जीवन के अधिकार में स्वच्छ पानी शामिल है।
  • जल जीवन मिशन / हर घर जल योजना: हर ग्रामीण परिवार को नल से पानी देना अनिवार्य लक्ष्य।
  • पंचायती राज अधिनियम: ग्राम पंचायत की जिम्मेदारी है मूलभूत सुविधाएं देना।

👉 फिर सवाल यह है—
क्या कोसमदा के लोग इस देश के नागरिक नहीं हैं?
क्या जंगल क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का अधिकार नहीं?


💥 प्रशासन की चुप्पी—सबसे बड़ा अपराध?

ग्रामीण बताते हैं कि उन्होंने पंचायत को सूचना दी, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
अब सवाल जिला प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों पर है—

  • क्या अधिकारियों ने कभी जमीनी निरीक्षण किया?
  • क्या योजना सिर्फ कागजों में पूरी दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया?
  • आखिर 300 करोड़ की योजना में एक गांव को पानी क्यों नहीं?

📢 प्रशासन से सीधा सवाल

जिला कलेक्टर महोदय से ग्रामीणों का सीधा प्रश्न—

👉 “क्या करोड़ों की योजना पर हमारा हक नहीं है?”
👉 “क्या हमें प्यासा मरने के लिए छोड़ दिया गया है?”


🚨 मांग

  • तत्काल जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई
  • कोसमदा गांव में तुरंत पानी सप्लाई शुरू हो
  • पंचायत और संबंधित विभाग के खर्चों की जांच हो

🔥 यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि उस सिस्टम की पोल है जो कागजों में विकास और जमीन पर उपेक्षा दिखाता है।
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह “हर घर जल” नहीं, बल्कि “हर घर छल” कहलाएगा।

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