सूचना अधिकार अधिनियम की खुली अवहेलना, तेंदुखेड़ा नगर परिषद के अधिकारियों पर राज्य सूचना आयोग में गंभीर प्रकरण दर्ज

दमोह।
जिला दमोह अंतर्गत तेंदुखेड़ा नगर परिषद के अधिकारियों द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम 2005 की निरंतर और जानबूझकर अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। नगर परिषद तेंदुखेड़ा के सहायक लोक सूचना अधिकारी दीपक कोष्ठी द्वारा न केवल आवेदक को निर्धारित समय-सीमा में सूचना प्रदान नहीं की गई, बल्कि प्रथम अपीलीय अधिकारी संयुक्त संचालक सागर के विधिसम्मत आदेश की भी अवज्ञा की गई, जो अधिनियम की धारा 19 एवं 20 का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
इस प्रकरण में आवेदक लक्ष्मण रैकवार, निवासी तेंदुखेड़ा द्वारा दिनांक 04/11/2025 को राज्य सूचना आयोग के समक्ष दो द्वितीय अपीलें प्रस्तुत की गईं। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोनों प्रकरणों को पंजीबद्ध कर विधिवत सुनवाई हेतु स्वीकार कर लिया है।
राज्य सूचना आयोग में यह प्रकरण क्रमशः
A-6807/SIC/DAMOH/2025 एवं A-6806/SIC/DAMOH/2025
क्रमांक पर दर्ज किया गया है।

आवेदक द्वारा बताया गया कि उन्होंने सूचना अधिकार अधिनियम के अंतर्गत नगर परिषद तेंदुखेड़ा में दिनांक 27/06/2025 एवं 27/08/2025 को आवेदन प्रस्तुत किए थे, किंतु अधिनियम की धारा 7(1) के अंतर्गत निर्धारित 30 दिवस की समय-सीमा समाप्त हो जाने के बावजूद कोई सूचना प्रदान नहीं की गई। इसके पश्चात आवेदक ने प्रथम अपील प्रस्तुत की, जिस पर संयुक्त संचालक सागर द्वारा सूचना उपलब्ध कराने के स्पष्ट आदेश पारित किए गए, परंतु सहायक लोक सूचना अधिकारी दीपक कोष्ठी द्वारा उक्त आदेश को जानबूझकर अनुपालित नहीं किया गया।
आवेदक ने यह भी आरोप लगाया कि लोक सूचना अधिकारी पीयूष अग्रवाल एवं सहायक लोक सूचना अधिकारी दीपक कोष्ठी द्वारा अधिनियम के प्रावधानों की उपेक्षा करते हुए प्रकरण को अनावश्यक रूप से जटिल बनाया गया तथा सूचना के अधिकार का प्रयोग कर रहे आवेदक को गुमराह किया गया, जो अधिनियम की मंशा के विपरीत है।
लक्ष्मण रैकवार ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे राज्य सूचना आयोग के समक्ष सहायक लोक सूचना अधिकारी दीपक कोष्ठी पर धारा 20 के अंतर्गत अधिकतम अर्थदंड (₹25,000) लगाए जाने तथा विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा की मांग करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर परिषद तेंदुखेड़ा द्वारा जनसूचनाओं को सुनियोजित ढंग से रोका जाता है, ताकि जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा किए गए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर से परदा डाला जा सके।
सूत्रों के अनुसार राज्य सूचना आयोग शीघ्र ही दोनों प्रकरणों में सुनवाई की तिथि निर्धारित करेगा। आयोग के निर्णय पर अब यह निर्भर करेगा कि सूचना अधिकार अधिनियम की अवमानना करने वाले अधिकारियों पर कितनी कठोर कार्रवाई की जाती है और क्या नगर परिषद तेंदुखेड़ा में पारदर्शिता सुनिश्चित हो पाएगी।
