तेंदूखेड़ा में निजी पैथोलॉजी लैब की जांच व्यवस्था पर सवाल, सरकारी और निजी रिपोर्ट में अंतर से मरीज चिंतित

0
Spread the love

बिना डॉक्टर की पर्ची जांच करने और मनमाने दाम वसूलने के आरोप; खंड चिकित्सा अधिकारी ने कहा—जल्द होगी कार्रवाई

तेंदूखेड़ा (दमोह)। नगर में संचालित निजी पैथोलॉजी लैब की जांच व्यवस्था और मरीजों से वसूले जा रहे शुल्क को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक मरीज ने सरकारी अस्पताल और निजी लैब में एक ही दिन कराई गई जांचों की रिपोर्ट में अंतर होने का दावा किया है। वहीं, बिना डॉक्टर की पर्ची जांच करने, निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लेने और प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर भी शिकायतें सामने आई हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, तेंदूखेड़ा निवासी एक व्यक्ति ने 8 अक्टूबर 2026 को शाम करीब चार बजे सरकारी अस्पताल में थायराइड, सीबीसी और शुगर की जांच के लिए रक्त का नमूना दिया। इसी दिन तारादेही तिगड्डे स्थित लाइफ केयर पैथोलॉजी लैब में भी उसी प्रकार की जांच कराई। मरीज के अनुसार, निजी लैब में तीनों जांचों के लिए कुल 800 रुपये मांगे गए, जिसमें थायराइड के 500, सीबीसी के 250 और शुगर के 50 रुपये बताए गए। मरीज ने ऑनलाइन भुगतान कर रिपोर्ट प्राप्त की।

थायराइड और सीबीसी रिपोर्ट में बताया अंतर

मरीज द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, निजी लैब की थायराइड रिपोर्ट में टी-3 का मान 121, टी-4 का 8.18 और टीएसएच का 6.99 दर्ज था। वहीं, सरकारी अस्पताल की रिपोर्ट में टी-3 का मान 0.66, टी-4 का 80.90 और टीएसएच का 6.69 बताया गया। इसी तरह सीबीसी जांच में भी हीमोग्लोबिन, प्लेटलेट्स सहित कुछ अन्य मानों में अंतर होने का दावा किया गया है।

मरीज का कहना है कि दोनों रिपोर्टों का मिलान करने पर उसे अंतर दिखाई दिया, जिससे वह चिंतित हो गया। हालांकि, इन रिपोर्टों के बीच अंतर का वास्तविक कारण जानने के लिए जांच की विधि, इस्तेमाल की गई मशीन, रिपोर्ट में दर्ज इकाइयों और संदर्भ मानों सहित सभी तकनीकी पहलुओं की विशेषज्ञों से जांच कराना जरूरी है।

बिना पर्ची जांच और प्रशिक्षित कर्मचारी को लेकर सवाल

मरीज ने आरोप लगाया कि वह बिना डॉक्टर की पर्ची के निजी लैब पहुंचा था और वहां मौजूद एक युवक ने उसका रक्त नमूना लिया। मरीज के अनुसार, उसे यह जानकारी नहीं मिली कि नमूना लेने वाला युवक प्रशिक्षित था या नहीं। उसने यह भी आरोप लगाया कि लैब में रेट लिस्ट चस्पा नहीं थी और कागजों में दर्ज लैब टेक्नीशियन नीरज साहू मौके पर मौजूद नहीं मिले।

स्थानीय लोगों का कहना है कि निजी लैबों के संचालन, कर्मचारियों की योग्यता, जांच की गुणवत्ता और शुल्क व्यवस्था की नियमित निगरानी होनी चाहिए। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि निजी लैबों की रिपोर्ट में अंतर के कारण मरीजों में भ्रम और चिंता की स्थिति बन सकती है। हालांकि, जानबूझकर गलत या डराने वाली रिपोर्ट देने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।

जांच और कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों ने खंड चिकित्सा अधिकारी से मांग की है कि लाइफ केयर पैथोलॉजी सहित नगर की अन्य निजी लैबों का निरीक्षण किया जाए। लैबों के पंजीयन, आवश्यक अनुमति, तकनीकी कर्मचारियों की योग्यता, जांच उपकरणों, गुणवत्ता नियंत्रण और मरीजों से लिए जा रहे शुल्क की जांच कराई जाए। साथ ही, निर्धारित नियमों के अनुसार रेट लिस्ट प्रदर्शित कराने और अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है। लैबों पर लागू कर पंजीयन संबंधी नियमों की भी जांच करने की मांग उठी है।

खंड चिकित्सा अधिकारी ने क्या कहा?

खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक बरौनिया ने बताया कि निजी लैबों में इस्तेमाल होने वाले सस्ते केमिकल के कारण रिपोर्टों में अंतर आने की संभावना रहती है। उन्होंने कहा कि मनमाने शुल्क वसूले जाने की शिकायतें भी मिल रही हैं और एसडीएम के निर्देशन में जल्द कार्रवाई की जाएगी।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में निजी लैबों के संचालन, जांच की गुणवत्ता और शुल्क संबंधी शिकायतों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। मरीजों के स्वास्थ्य और जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता को देखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

About The Author

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

error: Content is protected !!