25 वर्षों से आस्था का केंद्र बनीं नगर सेठानी, मां ज्वाला देवी मंदिर के सानिध्य में विराजमान हैं मां दुर्गा

सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति की भव्य स्थापना, दिव्य महाआरती और प्रतिदिन महाप्रसाद वितरण बनता है श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र
तेंदूखेड़ा (दमोह)। धर्म, आस्था और भक्ति की त्रिवेणी जब एक साथ प्रवाहित होती है, तो वातावरण स्वतः ही भक्तिमय हो उठता है। कुछ ऐसा ही दिव्य और मनोहारी दृश्य शारदीय नवरात्रि के दौरान तेंदूखेड़ा नगर में देखने को मिलता है, जहां वार्ड क्रमांक 7 एवं 8 की आराध्य मां दुर्गा, जिन्हें श्रद्धालु स्नेह और श्रद्धा से ‘नगर सेठानी’ के नाम से पुकारते हैं, अपनी भव्यता और दिव्यता से भक्तों को आकर्षित करती हैं। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजित यह धार्मिक उत्सव पिछले 25 वर्षों से नगर की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बना हुआ है।
मां ज्वाला देवी मंदिर के सानिध्य में बढ़ती है प्रतिमा की दिव्यता
नगर सेठानी की स्थापना सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर स्थित मां ज्वाला देवी मंदिर के सामने की जाती है। मंदिर के पावन सानिध्य में विराजमान मां दुर्गा की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के मन में विशेष श्रद्धा और विश्वास का संचार करती है। मां ज्वाला देवी मंदिर की धार्मिक महत्ता और उसके समक्ष सुसज्जित दुर्गा दरबार का दृश्य पूरे वातावरण को भक्तिमय बना देता है।

नवरात्रि के दौरान आकर्षक सजावट, मां के दर्शन के लिए उमड़ते श्रद्धालु और चारों ओर गूंजते जय माता दी के जयकारे नगर के धार्मिक वातावरण को और भी मनोहारी बना देते हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो मां दुर्गा स्वयं अपने भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर के मध्य विराजमान हों।
दिव्य महाआरती में उमड़ता है श्रद्धा का सैलाब
नगर सेठानी की आरती नवरात्रि उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहती है। प्रतिदिन आयोजित होने वाली दिव्य आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर मां दुर्गा की आराधना करते हैं। घंटियों की मधुर ध्वनि, आरती के स्वर और माता रानी के जयकारों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है।
आरती के समय श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है। भक्त मां के समक्ष शीश झुकाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं। समिति द्वारा प्रतिदिन महाप्रसाद का वितरण भी किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
25 वर्षों से कायम है धार्मिक परंपरा
सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा पिछले 25 वर्षों से पूरे उत्साह, श्रद्धा और गरिमा के साथ मां दुर्गा की स्थापना की जा रही है। समिति के सदस्य नवरात्रि आयोजन को सफल बनाने के लिए दिन-रात परिश्रम करते हैं। मां के दरबार की साज-सज्जा से लेकर श्रद्धालुओं की सुविधाओं, आरती और महाप्रसाद वितरण तक प्रत्येक व्यवस्था में समिति के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रहती है।
यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि नगरवासियों को एक सूत्र में बांधने और नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम भी है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा श्रद्धा, सेवा और सामूहिक सहयोग की भावना को निरंतर मजबूत कर रही है।
यातायात व्यवस्था और प्रशासन के सहयोग का भी रखती है ध्यान
सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर प्रतिमा की स्थापना होने के कारण श्रद्धालुओं की भीड़ के साथ यातायात व्यवस्था का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होता है। सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा आयोजन के दौरान यातायात सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन करने में सुविधा हो और आवागमन भी प्रभावित न हो।
समिति ने आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले प्रशासन, वार्डवासियों और नगर के सभी श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त किया है। समिति का मानना है कि नगरवासियों के सहयोग और मां दुर्गा के आशीर्वाद से ही यह धार्मिक परंपरा निरंतर आगे बढ़ रही है।
समिति ने श्रद्धालुओं से की दर्शन और आरती में शामिल होने की अपील
सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति ने नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में नगर सेठानी के दर्शन करने और दिव्य महाआरती में शामिल होने की अपील की है। समिति ने विशेष रूप से अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे अपने बच्चों को भी मां दुर्गा के दर्शन और आरती में साथ लेकर आएं, ताकि उनमें बचपन से ही धर्म, संस्कार, सेवा और भारतीय संस्कृति के प्रति श्रद्धा की भावना विकसित हो।
25 वर्षों की अखंड धार्मिक परंपरा, मां ज्वाला देवी मंदिर का पावन सानिध्य और नगर सेठानी का भव्य दरबार—ये सभी मिलकर तेंदूखेड़ा के नवरात्रि उत्सव को विशेष पहचान प्रदान करते हैं। मां दुर्गा के जयकारों से गूंजता यह दरबार श्रद्धालुओं के लिए केवल दर्शन का स्थल नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक शांति का पावन केंद्र बन जाता है।
