तेंदूखेड़ा में 75 वर्षों से चली आ रही मां दुर्गा की आराधना, साहू परिवार निभा रहा परंपरा

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स्वर्गीय सेठ मथुरा प्रसाद साहू ने की थी दुर्गा प्रतिमा स्थापना की शुरुआत, आज भी श्रद्धा और विश्वास के साथ जारी है मां की सेवा

तेंदूखेड़ा (दमोह)। शारदेय नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, आस्था और भक्ति का प्रतीक है। तेंदूखेड़ा नगर में मां दुर्गा उत्सव समिति द्वारा स्थापित झांकी वर्षों पुरानी धार्मिक परंपरा और पारिवारिक संस्कारों की कहानी बयां कर रही है। लगभग 75 वर्ष पूर्व स्वर्गीय सेठ मथुरा प्रसाद साहू द्वारा शुरू की गई मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापना की परंपरा आज भी उनके परिवार द्वारा निरंतर निभाई जा रही है।

मां दुर्गा उत्सव समिति के संचालक राजा साहू ने बताया कि उनके स्वर्गीय दादा सेठ मथुरा प्रसाद साहू ने लगभग 75 वर्ष पहले शारदेय नवरात्रि के अवसर पर देवी प्रतिमा की स्थापना की शुरुआत की थी। तभी से परिवार द्वारा प्रतिवर्ष मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की जाती रही है। समय बदला, पीढ़ियां बदलीं, लेकिन मां की सेवा और आराधना के प्रति परिवार की आस्था आज भी कायम है।

धार्मिक नाट्य मंचन से गुलजार रहती थीं नवरात्रि की रातें

राजा साहू ने बताया कि पहले नवरात्रि के दौरान स्थानीय कलाकारों द्वारा धार्मिक एवं सांस्कृतिक कथाओं पर आधारित नाट्य मंचन किया जाता था। इन प्रस्तुतियों को देखने के लिए नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग पहुंचते थे और देर रात तक बैठकर धार्मिक प्रसंगों का आनंद लेते थे। इन आयोजनों के माध्यम से लोगों को धार्मिक कथाओं और आदर्शों से जुड़ने का अवसर मिलता था।

समय के साथ पीढ़ियों में बदलाव आया और धीरे-धीरे धार्मिक नाट्य मंचन की परंपरा समाप्त होती चली गई। वर्तमान में श्रद्धालु मां दुर्गा की झांकी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। हालांकि, पुराने आयोजनों की यादें आज भी क्षेत्र के लोगों के बीच इस उत्सव की पहचान बनी हुई हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में भी है विशेष पहचान

राजा साहू के अनुसार, स्वर्गीय सेठ मथुरा प्रसाद साहू के समय इस आयोजन में विशेष साज-सज्जा की जाती थी और धार्मिक उत्सव का अलग ही आकर्षण रहता था। उनके नाम से यह आयोजन आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी प्रसिद्ध रहा है। वर्तमान समय में सीमित सजावट के साथ आयोजन किया जाता है, लेकिन मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा और परंपरा के निर्वहन में कोई कमी नहीं आने दी जा रही है।

उन्होंने बताया कि इस धार्मिक आयोजन को परिवार के सदस्यों और मोहल्लेवासियों के सहयोग एवं मार्गदर्शन से संपन्न किया जाता है। परिवार का प्रयास है कि आने वाली पीढ़ियां भी इस धार्मिक परंपरा को आगे बढ़ाएं।

राजा साहू ने भावुकता के साथ कहा कि जिस तरह उनके दादा ने अपना जीवन मां की सेवा में समर्पित किया, उसी तरह वे भी मां दुर्गा की सेवा और आराधना करते रहना चाहते हैं। उनका उद्देश्य है कि यह परंपरा भविष्य में भी निरंतर चलती रहे और नई पीढ़ी अपनी धार्मिक विरासत से जुड़ी रहे।

यहां स्थापित है मां दुर्गा की झांकी: तेंदूखेड़ा नगर के वार्ड क्रमांक 4 स्थित बजरंगबली चौराहा, सब्जी मंडी क्षेत्र में स्थापित यह झांकी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। लगभग 75 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल प्रतिमा स्थापना तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार की भक्ति, पूर्वजों के संस्कार और धार्मिक विरासत को संजोने का भी प्रतीक है।

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