रानी दुर्गावती अभ्यारण्य की सुरक्षा में सेंध! जगह-जगह टूटी खकरी से सैकड़ों मवेशियों की घुसपैठ, वन्यजीवों की सुरक्षा पर खतरा

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बीट खापा में अवैध चराई के आरोप, अभ्यारण्य के विशेष चरागाहों को भी नुकसान पहुंचने की आशंका; जिम्मेदारी को लेकर वन अधिकारियों के अलग-अलग बयान

तेंदूखेड़ा (दमोह)। रानी दुर्गावती अभ्यारण्य में वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभ्यारण्य की सुरक्षा के लिए बनाई गई खकरी (बाड़) जगह-जगह से टूटी होने के कारण सैकड़ों गाय, भैंस और बकरियों के अंदर प्रवेश करने तथा कथित तौर पर अवैध चराई किए जाने का मामला सामने आया है। इससे वन्यजीवों, विशेषकर शेरों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। वहीं, अभ्यारण्य में अनधिकृत रूप से लोगों की आवाजाही होने के आरोप भी लगाए गए हैं।

सरकार द्वारा वन्यजीवों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक रहवास को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से बड़े स्तर पर विस्थापन और अन्य व्यवस्थाएं की गई हैं। अभ्यारण्य की सुरक्षा के लिए जिला लाइन के रूप में खकरी बनाई गई है। इसकी निगरानी के लिए विभिन्न स्थानों पर चौकियां स्थापित हैं, जहां बीट गार्ड और चौकीदारों की तैनाती की गई है। इसके बावजूद सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही के आरोप सामने आना गंभीर सवाल खड़े करता है।

बीट खापा में मवेशियों की अवैध चराई के आरोप

तेंदूखेड़ा से करीब 20 किलोमीटर दूर ग्राम समनापुर के कुछ लोगों के संबंध में आरोप है कि वे बारिश के मौसम में ग्राम कोसमदा में चार महीने तक डेरा बनाकर रहते हैं। इस दौरान उनकी गाय, भैंस और बकरियों को रोजाना कोसमदा से खापा की ओर ले जाकर अभ्यारण्य क्षेत्र में चराया जाता है। आरोप है कि मवेशियों को केवल दूध निकालने के समय डेरे पर लाया जाता है, जबकि बाकी समय वे जंगल में रहते हैं।

ग्राम कोसमदा और खापा के अभ्यारण्य क्षेत्र में आने की बात सामने आई है। ऐसे में इन क्षेत्रों में लोगों और मवेशियों की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी की आवश्यकता है। बताया जाता है कि खापा गांव को खाली कराने के बाद वन विभाग ने जंगली शाकाहारी वन्यजीवों के लिए विशेष चरागाह तैयार कराया है। आरोप है कि इन चरागाहों में घरेलू मवेशियों के प्रवेश से वन विभाग की व्यवस्थाओं को नुकसान पहुंच रहा है।

कर्मचारियों को दूध-घी देने का भी दावा

मवेशियों के कुछ मालिकों के हवाले से यह दावा किया गया है कि वे तारादेही रेंज के कर्मचारियों को जानकारी देकर और कथित तौर पर खर्च-पानी देकर कोसमदा में रहते हैं। उन्होंने कर्मचारियों को दूध और घी देने की बात भी कही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभागीय जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

बकरी का शिकार करने पहुंचा शेर, लोगों की मौजूदगी से सुरक्षा पर सवाल

मामले का एक चिंताजनक पहलू यह भी बताया गया है कि जिस दिन टीम अभ्यारण्य क्षेत्र में पहुंची, उसी सुबह एक शेर द्वारा एक बकरी का शिकार किए जाने की जानकारी मिली। इसके बाद छह से सात लोग बकरी को देखने के लिए मौके पर पहुंचे थे, जहां शेर भी मौजूद था। खापा चौकी के बीट गार्ड सत्यजीत राजपूत ने भी इस घटनाक्रम की जानकारी दिए जाने की बात सामने आई है।

यदि अभ्यारण्य क्षेत्र में अनधिकृत रूप से लोगों की आवाजाही और मवेशियों की चराई हो रही है, तो इससे इंसानों और वन्यजीवों, दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। ऐसे में खकरी की मरम्मत, नियमित गश्त और प्रवेश पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है।

19 साल से एक ही स्थान पर पदस्थ बीट गार्ड

बीट गार्ड सत्यजीत राजपूत ने बताया कि वे करीब 19 वर्षों से इसी क्षेत्र में पदस्थ हैं और स्थानीय लोगों से उनका व्यवहारिक परिचय हो गया है। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए बीट गार्ड का तत्काल स्थानांतरण किए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण निगरानी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अधिकारियों के अलग-अलग बयान

डिप्टी रेंजर सुनील दुबे ने बताया कि इस तरह की शिकायतें सामने आई थीं। उन्होंने बीट गार्ड को निर्देश देकर उन स्थानों पर खकरी बंद करवाने की बात कही, जहां से वह खुली हुई थी।

डीएफओ रजनीश कुमार सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत के रूप में जांच कराकर कार्रवाई करवाने की बात कही है।

तारादेही रेंजर देवेंद्र सिंह के अनुसार, कोसमदा के संबंध में सरकार का नोटिफिकेशन आ चुका है और यह क्षेत्र तारादेही रेंज से अलग होकर अभ्यारण्य में शामिल हो गया है। वहीं, सर्रा रेंज के रेंजर संजीवरंजन ने बताया कि नोटिफिकेशन आया है, लेकिन उनके अनुसार वह अभी प्रभावी रूप से अस्तित्व में नहीं आया है और क्षेत्र बफर जोन में होने के कारण फिलहाल देखरेख तारादेही रेंज द्वारा ही की जाएगी।

अधिकारियों के इन बयानों के बाद क्षेत्र की निगरानी और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता महसूस हो रही है।

निष्पक्ष जांच और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग

स्थानीय लोगों ने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि खकरी की स्थिति का निरीक्षण कराया जाए, अभ्यारण्य में मवेशियों की कथित अवैध चराई और लोगों की आवाजाही की निष्पक्ष जांच हो तथा यदि किसी कर्मचारी की लापरवाही या मिलीभगत प्रमाणित होती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा कर आवश्यकतानुसार स्थानांतरण किया जाए।

अब देखना होगा कि वन विभाग इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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