धोखाधड़ी और जातिसूचक अपमान का सनसनीखेज मामला: मदद के बहाने युवक को बनाया लाखों का कर्जदार, शिकायत करने पर दी जेल भेजने की धमकी

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  • स्थान: तेंदूखेड़ा (दमोह)
  • मुख्य आरोपी: अरुण दुबे उर्फ टींकू महाराज एवं उसकी पत्नी विशाखा दुबे
  • पीड़ित: सुमित राय (शिक्षा विभाग में भृत्य, निवासी- वार्ड नं. 08, तेंदूखेड़ा)
    तेंदूखेड़ा। मदद करने के नाम पर एक सीधे-साधे युवक और उसके परिवार को झांसे में लेकर लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने और फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंक से लोन कराकर कर्जदार बनाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित सुमित राय ने थाना प्रभारी तेंदूखेड़ा को आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि आरोपियों ने न केवल उससे लाखों रुपये हड़प लिए, बल्कि विरोध करने पर उसे और उसकी बहन को सरेआम जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने और फर्जी चेक के जरिए जेल भिजवाने की धमकी भी दी।
    मकान खाली होने के विवाद से शुरू हुई कहानी
    शिकायत के अनुसार, पीड़ित सुमित राय शिक्षा विभाग में भृत्य के पद पर अनुकंपा नियुक्ति पर कार्यरत है। उसने अपना पुराना मकान तेंदूखेड़ा निवासी दीपक साहू को बेचा था। जब मकान खाली करने को लेकर दीपक साहू से उसका विवाद हुआ, तो वार्ड नं. 11 निवासी आरोपी अरुण दुबे उर्फ टींकू महाराज ने मामले को सुलझाने और जबलपुर के बड़े वकीलों से पहचान होने का झांसा देकर पीड़ित को अपने जाल में फंसा लिया। कानूनी कार्रवाई और मदद के नाम पर आरोपी ने पीड़ित से अलग-अलग किश्तों में कुल 32,000 रुपये ऐंठ लिए।
    पुरानी गाड़ी बेचने के नाम पर बड़ा खेल
    इसके बाद आरोपियों ने पीड़ित को अपनी जाल में और गहरा फंसाया। आरोपी अरुण दुबे ने पीड़ित से कहा कि उसे अपनी मारुति स्विफ्ट कार (नंबर MP34ZA8157) बेचनी है। पीड़ित के मना करने पर आरोपी ने झांसा दिया कि वह बैंक से नया लोन पास करवा देगा, जिससे पुराना लोन भी चुकता हो जाएगा और बची हुई रकम सुमित को मिल जाएगी।
    सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से सुमित राय और उसके भाई के नाम पर 7,00,000 रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया। लोन राशि आते ही आरोपियों ने चालाकी से पुराना लोन समायोजित कराया और बची हुई राशि 1,49,000 रुपये पीड़ित के खाते से तुरंत विड्रॉल फॉर्म पर हस्ताक्षर कराकर अपनी पत्नी विशाखा दुबे के खाते में ट्रांसफर करवा लिए।
    फर्जी एग्रीमेंट और स्टाम्प की हेराफेरी
    धोखाधड़ी यहीं नहीं रुकी, आरोपियों ने पीड़ित से उसकी ससुराल से 2,00,000 रुपये और मंगवाए। जब पीड़ित ने गाड़ी अपने नाम ट्रांसफर करने को कहा, तो आरोपी उसे आरटीओ ऑफिस के किसी एजेंट से मिलाने ले गए और मोबाइल पर आए ओटीपी का गलत इस्तेमाल कर गाड़ी ट्रांसफर करने के बजाय पीड़ित के नाम पर KOGTA FINANCIAL INDIA LTD. से 5,76,268 रुपये का एक और फाइनेंस लोन करवा दिया। इस तरह पीड़ित को बिना गाड़ी दिए ही लाखों का कर्जदार बना दिया गया।
    आरोपियों ने पीड़ित के मोबाइल का दुरुपयोग कर उसकी जानकारी के बिना दो स्टाम्प पेपर खरीदे। पीड़ित की पत्नी विशाखा दुबे के नाम पर 12,57,000 रुपये की फर्जी आपसी लिखा-पढ़ी (सुरक्षा निधि) का कूटरचित दस्तावेज तैयार कर लिया, जबकि पीड़ित ने ऐसी कोई राशि कभी नहीं ली।
    लाखों हड़पने के बाद अब जेल भेजने की धमकी
    दस्तावेजों के अनुसार, आरोपी पीड़ित से अब तक अलग-अलग तारीखों में कुल 7,02,500 रुपये नगद और बैंक ट्रांसफर के जरिए ले चुके हैं। इसके अलावा पीड़ित के नाम पर 5,76,268 रुपये का फर्जी कार लोन भी करा दिया गया। इस तरह कुल 12,78,748 रुपये की धोखाधड़ी की गई है।
    जब पीड़ित को इस पूरी ठगी का अहसास हुआ और वह 30 सितंबर 2026 को आरोपियों के घर शिकायत करने पहुंचा, तो आरोपी अरुण दुबे और उसकी पत्नी भड़क गए। उन्होंने पीड़ित और उसकी बहन को सरेआम बेहद गंदी और जातिसूचक गालियां दीं। आरोपियों ने पीड़ित को धमकाते हुए कहा कि उनके पास पीड़ित के हस्ताक्षर किए हुए खाली चेक हैं, जिनका इस्तेमाल कर वे उसे जिंदगी भर के लिए जेल भिजवा देंगे।
    कार को जब्त करने और एफआईआर की मांग
    पीड़ित सुमित राय ने पुलिस को दिए आवेदन में मांग की है कि आरोपियों के कब्जे से उक्त मारुति स्विफ्ट कार को तुरंत जब्त किया जाए, ताकि वे इसका इस्तेमाल किसी अवैध कार्य में न कर सकें। साथ ही कूटरचित दस्तावेज बनाने, धोखाधड़ी करने और अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत आरोपियों के खिलाफ सख्त आपराधिक मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
    अनावेदक अरुण दुबे का पक्ष जानने के लिये फोन लगाया तो अरुण दुबे ने बताया है कि हमारे पास वेध अनुबंध है सारे दस्तावेज ऑनलाइन प्रोसेस के है चेक, वीडियोगवाह हर चीज है हमारे पक्ष में हमने भी थाना तेंदुखेड़ा एवं पुलिस अधीक्षक को दिए है आवेदन

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