एकलव्य विश्वविद्यालय में ‘उत्पीड़न-मुक्त विश्वविद्यालयी वातावरण’पर अतिथि व्याख्यान आयोजित

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*सम्मान, सुरक्षा, समानता एवं गरिमा से परिपूर्ण परिसर के निर्माण का लिया संकल्प
दमोह। एकलव्य विश्वविद्यालय, दमोह में आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के तत्वावधान में शनिवार को “उत्पीड़न-मुक्त विश्वविद्यालयी वातावरण का निर्माण—सम्मान, सुरक्षा, समानता एवं गरिमा से परिपूर्ण परिसर” विषय पर अतिथि व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षित, सम्मानजनक एवं सकारात्मक वातावरण निर्मित करने के साथ विद्यार्थियों एवं शैक्षणिक तथा गैर-शैक्षणिक सदस्यों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों एवं शिकायत निवारण व्यवस्था के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि वक्ता के रूप में डॉ. बृजेश कुलपाड़िया, जिला आयुष अधिकारी, दमोह एवं लीगल डिफेंस एडवोकेट रिचा त्रिपाठी, जिला न्यायालय, दमोह उपस्थित रहीं।
विज्ञान विभाग के सहायक प्राध्यापक श्री मुकेश तिवारी ने दोनों अतिथियों का गरिमापूर्ण परिचय कराया। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता रिचा त्रिपाठी जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर अभियुक्तों को भी विधिक सहायता प्रदान करती हैं, वहीं डॉ. बृजेश कुलपाड़िया आयुष विभाग के माध्यम से जनसेवा के क्षेत्र में अनेक निःशुल्क सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
छोटी घटनाओं को नजरअंदाज करना आगे चलकर बन सकता है गंभीर समस्या : अधिवक्ता रिचा त्रिपाठी
मुख्य वक्ता लीगल डिफेंस एडवोकेट रिचा त्रिपाठी ने उत्पीड़न की रोकथाम के प्रति जागरूकता को आवश्यक बताते हुए कहा कि कई बार हम छोटी-छोटी घटनाओं, टिप्पणियों अथवा अनुचित व्यवहार को यह सोचकर नजरअंदाज कर देते हैं कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। लेकिन यदि ऐसे व्यवहार को समय रहते रोका न जाए, तो यही छोटी घटनाएं आगे चलकर गंभीर उत्पीड़न का रूप ले सकती हैं।उन्होंने कहा कि शारीरिक, मानसिक, मौखिक अथवा किसी अन्य रूप में होने वाले उत्पीड़न को सहन करने के बजाय प्रारंभिक स्तर पर ही उसके विरुद्ध आवाज उठाना और रोकथाम के लिए उचित कदम उठाना आवश्यक है।
सुरक्षित एवं सहज वातावरण प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार : डॉ. बृजेश कुलपाड़िया
जिला आयुष अधिकारी डॉ. बृजेश कुलपाड़िया ने अपने संबोधन मे कहा कि यदि किसी विद्यार्थी, शिक्षक अथवा शिक्षिका को कार्यस्थल या विश्वविद्यालय परिसर में किसी प्रकार की असहजता, अनुचित व्यवहार अथवा उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो उसके विरुद्ध निर्धारित नियमों एवं कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकती है।
कार्यक्रम में एकेडमिक डीन डॉ. एस. जे. पी. शमा खानम ने विषय की गंभीरता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विद्यार्थियों द्वारा शिक्षकों के प्रति अथवा शिक्षकों द्वारा विद्यार्थियों के प्रति किसी भी प्रकार का अनुचित व्यवहार या उत्पीड़न स्वीकार्य नहीं है। ऐसी किसी भी स्थिति का उचित एवं निष्पक्ष समाधान होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में प्रत्येक व्यक्ति को समानता, सम्मान एवं गरिमा के साथ रहने का अधिकार प्राप्त है।
कार्यक्रम की आंतरिक शिकायत समिति की पीठासीन अधिकारी डॉ. सुदेश बाला जैन ने सभी छात्र-छात्राओं से कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रकार का उत्पीड़न होने पर वे लिखित अथवा मौखिक रूप से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्राप्त शिकायतों का नियमानुसार उचित, निष्पक्ष एवं गोपनीय रूप से निराकरण किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में डॉ. शैलेंद्र जैन, श्री विनय मिश्रा, श्रीमती प्रकृति नागर स.प्रा.बबली लोधी, स.प्रा. रजनी राजपाल सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन शुभम विश्वकर्मा ने किया। अंत में श्री यशवंत पटेल ने अतिथियों, विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की कुलाधिपति डॉ. सुधा मलैया जी की गरिमामयी छत्रछाया में तथा प्रतिकूलाधिपति श्रीमती पूजा मलैया एवं श्रीमती रति मलैयाजी जीके निर्देशन में,कुलगुरु डॉ पवन जैन जी एवं कुल सचिव डॉ प्रफुल्ल शर्मा जी के प्रबंधन एवं प्रशासन के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने सुरक्षित, सम्मानजनक एवं उत्पीड़न-मुक्त शैक्षणिक वातावरण के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
