आंगनबाड़ी केंद्रों में कहीं भोजन तो कहीं नाश्ता नहीं, बच्चों के हक पर सवाल

तेंदूखेड़ा। आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सुबह गर्म नाश्ता और दोपहर का भोजन दिए जाने का प्रावधान है। इसका उद्देश्य बच्चों में कुपोषण को कम करना, उनकी उपस्थिति बढ़ाना तथा शारीरिक और मानसिक विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए संबंधित विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केंद्रों की निगरानी भी की जाती है।
लेकिन तेंदूखेड़ा ब्लॉक के कुछ आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों को निर्धारित नाश्ता और भोजन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत बमनोदा के आश्रित ग्राम ढहरा स्थित आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 112 में कार्यकर्ता के अनुसार करीब पांच वर्षों से बच्चों को न तो नाश्ता मिल रहा है और न ही भोजन।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता बिमला सेन ने बताया कि केंद्र में करीब 72 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन लंबे समय से भोजन और नाश्ता उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों की उपस्थिति भी प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार पहले जिस समूह द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जाता था, उसने भुगतान संबंधी समस्या के चलते काम बंद कर दिया। इसके बाद गांव के अन्य समूहों से भी भोजन व्यवस्था शुरू करने का प्रयास किया गया, लेकिन भुगतान को लेकर सहमति नहीं बन सकी। कार्यकर्ता का कहना है कि इसकी जानकारी तेंदूखेड़ा एवं जिला स्तर के संबंधित कार्यालयों को दी जा चुकी है, इसके बावजूद अभी तक व्यवस्था शुरू नहीं हुई है।
दूसरे केंद्र में तीन साल से नाश्ता नहीं मिलने का आरोप
इसी तरह ग्राम पंचायत पांजी पिडरई के आश्रित ग्राम पांजी स्थित सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक 94 में भी नाश्ता नहीं मिलने की बात सामने आई है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता गीता केवट के अनुसार केंद्र में 3 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 42 बच्चे दर्ज हैं और केंद्र शुरू होने के बाद से ही बच्चों को नाश्ता नहीं मिल रहा है।
कार्यकर्ता के अनुसार केंद्र में भोजन की व्यवस्था मां अम्बे स्व-सहायता समूह द्वारा की जाती है, लेकिन समूह की अध्यक्ष पार्वती लोधी द्वारा नाश्ता उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। कार्यकर्ता का कहना है कि नाश्ता नहीं मिलने की जानकारी तेंदूखेड़ा सहित वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है।
निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
दोनों मामलों में संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा उच्च कार्यालयों को सूचना दिए जाने के बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं होने से विभागीय निगरानी पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बच्चों के भोजन और नाश्ते के लिए शासन स्तर से राशि उपलब्ध कराई जा रही है, तो पात्र बच्चों तक निर्धारित पोषण आहार पहुंचाना संबंधित विभाग की जिम्मेदारी है।
लोगों ने मांग की है कि दोनों आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था की जांच कराई जाए और बच्चों को नियमित रूप से निर्धारित नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाए, ताकि शासन की योजना का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंच सके।
इस संबंध में महिला एवं बाल विकास परियोजना तेंदूखेड़ा में साझा चूल्हा के प्रभारी गोविंद बेन से फोन पर जानकारी लेने का प्रयास किया गया। उन्होंने मीटिंग में होने की बात कहते हुए फोन काट दिया।
