बाल कलाकारों की अनूठी पहल: बच्चों ने घर पर बनाई मिट्टी की गणेश प्रतिमा, पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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खेत से लाई काली मिट्टी से गढ़ी प्रतिमा, घर पर किया विसर्जन; पेड़ की जड़ में अर्पित की पवित्र माटी

धन कुमार विशबकर्मा| हर्रई तेजगढ़। दमोह जिले के तेंदूखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत हर्रई सिंगौरगढ़ में बच्चों की सृजनात्मकता और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का अनूठा उदाहरण सामने आया है। आधुनिक दौर में जहां पीओपी और रासायनिक रंगों से बनी मूर्तियों के इस्तेमाल को लेकर पर्यावरण संबंधी चिंताएं सामने आती रहती हैं, वहीं गांव के नन्हे बाल कलाकारों ने प्राकृतिक मिट्टी से गणेश प्रतिमा बनाकर एक प्रेरणादायक संदेश दिया है।

काली मिट्टी से गढ़ी आस्था की प्रतिमा

ग्राम हर्रई सिंगौरगढ़ के बच्चों ने खेतों से शुद्ध काली मिट्टी एकत्रित की और अपने हाथों से भगवान श्री गणेश की छोटी-छोटी सुंदर प्रतिमाएं तैयार कीं। बच्चों ने बिना किसी विशेषज्ञ सहायता के अपनी कल्पनाशक्ति और हुनर से प्रतिमाओं को आकार दिया।

इस पहल में वेद विश्वकर्मा (4 वर्ष), वेदिका विश्वकर्मा (5 वर्ष), महेंद्र विश्वकर्मा (11 वर्ष) और गोविंद विश्वकर्मा (14 वर्ष) ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों की कम उम्र में मिट्टी से प्रतिमा बनाने की कला और श्रद्धा को देखकर परिवार और आसपास के लोग भी प्रभावित हुए।

गणेशोत्सव के दौरान विधि-विधान से की पूजा

बच्चों ने घर पर ही बनाई गई गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की। गणेश चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी तक श्रद्धा और विधि-विधान के साथ भगवान श्री गणेश की पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ गणेशोत्सव मनाया।

घर पर ही किया पर्यावरण हितैषी विसर्जन

गणेशोत्सव के समापन पर बच्चों ने विसर्जन के लिए भी अनूठा तरीका अपनाया। नदी या तालाब में प्रतिमा विसर्जित करने के बजाय घर पर ही एक टब में स्वच्छ जल भरकर उसमें गंगा जल और नर्मदा जल मिलाया गया। इसके बाद मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ गणेश प्रतिमा का उसी टब में विसर्जन किया गया।

इस पहल का उद्देश्य जलस्रोतों को मूर्ति विसर्जन से होने वाले संभावित प्रदूषण से बचाने और लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने का संदेश देना रहा।

मूर्ति की माटी को पेड़ की जड़ में किया अर्पित

प्रतिमा विसर्जन के बाद टब में घुली मिट्टी को फेंकने के बजाय बच्चों ने उसे घर के पास स्थित एक पेड़ की जड़ में अर्पित कर दिया। बच्चों की इस पहल ने आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया।

बच्चों द्वारा अपनाया गया यह तरीका यह दर्शाता है कि श्रद्धा और पर्यावरण संरक्षण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। गांव के इन बाल कलाकारों की पहल न केवल उनकी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाती है, बल्कि समाज को प्राकृतिक मिट्टी से प्रतिमा निर्माण और पर्यावरण हितैषी विसर्जन के लिए प्रेरित भी करती है।

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