पतलोनी में एक साथ विराजती हैं नौ देवियां, अनूठी परंपरा बनी आस्था का केंद्र

वर्ष 2003 में शुरू हुई परंपरा, नवरात्रि पंचमी को होती है स्थापना, शरद पूर्णिमा पर गुरैया नदी में विसर्जन
तेंदूखेड़ा। तहसील मुख्यालय तेंदूखेड़ा से करीब 25 किलोमीटर दूर ग्राम पतलोनी में शारदेय नवरात्रि के अवसर पर सजने वाला दिव्य दुर्गा पंडाल क्षेत्र में विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां नौ देवियों के नौ स्वरूपों की एक साथ स्थापना कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। क्षेत्र में अपनी तरह का अनूठा माने जाने वाले इस आयोजन में दूर-दराज से श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। धार्मिक आस्था के साथ ग्रामीणों की एकजुटता इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता है।
सात प्रतिमाओं से शुरू हुई अनूठी परंपरा
स्थानीय निवासी बेड़ी सिंह लोधी के अनुसार, वर्ष 2002 से पहले ग्राम पतलोनी की मड़िया में केवल दुर्गा जी की एक प्रतिमा स्थापित की जाती थी। वर्ष 2003 में पतलोनी निवासी उजियार सिंह बादकपुर में देवी प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे थे। उस वर्ष उनकी सात प्रतिमाएं बच गई थीं। प्रतिमाओं का शृंगार हो चुका था और उनकी आंखें भी खुल चुकी थीं, इसलिए उनकी स्थापना आवश्यक मानी गई।
इसके बाद उजियार सिंह ग्राम पतलोनी पहुंचे और उन्होंने उस समय के बीडीसी सदस्य राजकुमार लोधी को इसकी जानकारी दी। राजकुमार लोधी ने सात प्रतिमाएं ले लीं। पहले से स्थापित एक प्रतिमा को मिलाकर आठ प्रतिमाएं हो गईं। इसके बाद नौवें स्वरूप के रूप में दुर्गा जी की तस्वीर शामिल कर नौ देवियों की साधना की परंपरा शुरू हुई।
पहले वर्ष मां नर्मदा में हुआ विसर्जन, अब गुरैया नदी में होती है परंपरा
ग्राम पतलोनी में नौ देवियों की स्थापना शारदेय नवरात्रि की पंचमी को की जाती है, जबकि शरद पूर्णिमा पर विसर्जन होता है। ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2003 में परंपरा की शुरुआत के दौरान प्रतिमाओं का विसर्जन मां नर्मदा में किया गया था। इसके बाद से प्रतिवर्ष प्रतिमाओं का विसर्जन स्थानीय गुरैया नदी में किया जाता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा अब ग्राम पतलोनी की धार्मिक पहचान बन चुकी है।
भागवत कथा और धार्मिक नाट्य प्रस्तुतियां बढ़ाती हैं आयोजन की भव्यता
नवरात्रि के दौरान सप्तमी से पंडाल में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जाता है। वहीं, रात्रि में स्थानीय कलाकार धार्मिक प्रसंगों पर आधारित नाट्य प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को धर्म और संस्कृति से जोड़ते हैं। नौ देवियों के एक साथ दर्शन, कथा और धार्मिक कार्यक्रमों के कारण यहां भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
42 लोगों की भागीदारी, ग्रामीणों के सहयोग से होता है आयोजन
इस आयोजन की सबसे खास बात यह है कि इसका खर्च ग्रामीण मिल-जुलकर उठाते हैं। इस वर्ष नौ देवियों की स्थापना में मुख्य रूप से 42 लोगों ने भागीदारी की है। ग्राम पंचायत द्वारा प्रतिवर्ष टेंट का खर्च वहन किया जाता है। कोई भंडारे की व्यवस्था करता है, तो कोई पेयजल, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में सहयोग देता है। आयोजन में राजकुमार लोधी भी सहयोग करते हैं। इसके अलावा प्रतिमाओं की स्थापना करने वाले श्रद्धालु अपना खर्च व्यक्तिगत रूप से उठाते हैं।
आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक
ग्राम पतलोनी का यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों के आपसी सहयोग, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। नौ देवियों की एक साथ स्थापना की यह परंपरा क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। ग्रामीणों के सामूहिक प्रयासों से हर वर्ष यह आयोजन सफल होता है और नई पीढ़ी को धर्म, संस्कृति तथा सामाजिक एकता का संदेश देता है।
